अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में स्टाफ, स्टूडेंट्स व फैकल्टी के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं को लेकर बैठक हुई

Uncategorized

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में स्टाफ, स्टूडेंट्स व फैकल्टी के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं को लेकर बैठक हुई,जिसमें संकाय सदस्यों व एम्स प्रशासन के अधि​कारियों ने शिरकत की। बुधवार को एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत जी की अध्यक्षता में विभिन्न फैकल्टी, संकायगणों व संस्थान के अधिकारियों की की बैठक हुई,जिसमें विशेषरूप से अनुसूचित जाति जनजाति से जुड़े छात्रों व संकायगणों के लिए मंत्रालय द्वारा जारी दिशा निर्देशों के पालन की समीक्षा की गई। इस अवसर पर निदेशक एम्स पद्मश्री प्रो. रवि कांत जी ने पावर प्रजेंटेशन के माध्यम से एम्स संस्थान में संचालित कमजोर वर्ग के कार्मिकों से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत जी ने बताया कि संस्थान संविधान की भावना के अनुरूप, भारत सरकार की गाइडलाइन व डिमार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग डीओपीडी के नियमों के तहत कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि जो कमजोर वर्ग के विद्यार्थी अंग्रेजी का बहुत अच्छा ज्ञान नहीं रखते, ऐसे विद्यार्थियों के लिए एम्स संस्थान में अंग्रेजी की विशेष कक्षाएं संचालित की जा रही हैं,जिससे उन्हें आंग्लभाषा में दक्षता हासिल हो सके। निदेशक एम्स ने बताया कि अनुसंधान से जुड़े विद्यार्थियों के लिए रिसर्च पेपर की भाषा को अंतरराष्ट्रीय स्तर की बनाने के लिए संस्थान ने एक सॉफ्टवेयर लिया है, जो कि अंग्रेजी भाषा की त्रुटियों में सुधार का कार्य करेगा।लिहाजा ऐसे लोग इस सॉफ्टवेयर की मदद से अपने रिसर्च पेपर्स की भाषा को अंतरराष्ट्रीय स्तर की बना सकते हैं। साथ ही एक व्यक्ति के संपूर्ण विकास के लिए शिक्षा के साथ साथ संस्थान में अंतरराष्ट्रीय स्तर के टेनिस, बैडमिंटन, बास्केटबॉल और वॉलीबॉल के कोर्ट मौजूद है, जिसका फायदा सभी उठा सकते है। जो विद्यार्थी फीस भरने में असमर्थ हो उन्हें डीन स्टूडेंट वेलफेयर की संस्तुति पर फीस माफ की जा सकती है। निदेशक प्रो. रवि कांत जी ने बताया कि संस्थान में सुपर स्पेशलिटी के कई विभागों में फैकल्टी की अत्यधिक कमी है तथा ऐसे पाठ्यक्रम में आरक्षण का प्रावधान नहीं होने के कारण आरक्षित वर्ग की फैकल्टी मिलने में काफी दिक्कतें आ रही हैं, दूसरी ओर कारपोरेट अस्पतालों में सुपरस्पेशलिटी विभागों में ऐसे चिकित्सकों की अत्यधिक मांग भी इसकी एक प्रमुख वजह बनती जा रही है। बताया गया कि एम्स के विस्तार के मद्देनजर सीआईबी में कई विभागों में चिकित्सकों-फैकल्टी की संख्या में काफी इजाफा किया है। इसी को ध्यान में रखते हुए कुछ अत्यधिक व्यस्तता वाले एनेस्थिसिया, सर्जरी व मेडिसिन के विभागों में एम्स संस्थान को अधिक फैकल्टी तथा चिकित्सकों की नितांत आवश्यकता है। जिसे वित्त मंत्रालय से मंजूरी मिलते ही लागू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि संस्थान संविधान की भावना के अनुरूप कमजोर वर्ग के उत्थान के लिए अपने दायित्व को सततरूप से निभाएगा। इस अवसर पर उप निदेशक प्रशासन अंशुमन गुप्ता, डीन एकेडमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता, डीन स्टूडेंट्स वैलफेयर प्रो. पुनीत धर, डीन हॉस्पिटल अफेयर्स प्रो. यूबी मिश्रा, प्रो. वर्तिका सक्सेना, वित्तीय सलाहकार कमांडेंट पर्वत कुमार मिश्रा, प्रो. वीके बस्तिया, डा. रविकांत, डा. कुमार सतीश रवि, रूपेंद्र देयोल संकायगण एवं अधिकारी मौजूद थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *