चमन लाल कॉलेज लंढौरा में राजनीतिक विज्ञान विभाग की दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

Haridwar News

चीन के दखल से दक्षिण एशिया की शांति और स्थिरता पर प्रतिकूल प्रभावपड़ा -विशेषज्ञों की राय
डॉ नीशू कुमार द्वारा संपादित पुस्तक का विमोचन
हरिद्वार
“दक्षिण एशिया को भौगोलिक ऐतिहासिक व सांस्कृतिक रूप से एक ही इकाई के रूप में देखा जाना चाहिए। लेकिन वर्तमान में बाहरी ताकतों के बढ़ते प्रभाव में इस इकाई को छिन्न-भिन्न कर दिया है। इस क्षेत्र का सबसे बड़ा तेज होने के कारण इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाली में भारत की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। और क्षेत्र में चीन के दखल से शांति और स्थिरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है यह राय राजनीति विशेषज्ञों ने चमन लाल महाविद्यालय लंढौरा में दक्षिण एशिया में राजनीतिक स्थिरता एवं विकास में भारत की भूमिका विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में दी
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ की राजनीति विज्ञान विभाग की पूर्व प्रोफेसर अर्चना शर्मा ने मुख्य अतिथि के रुप में बोलते हुए कहा कि 80 के दशक में भारत ने म्यांमार और तिब्बत जैसे क्षेत्रों से अपना ध्यान हटाया जिसका फायदा चीन ने उस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ा कर उठाया। जिससे इस क्षेत्र में चीन का दखल बढ़ गया और इससे दक्षिण एशिया की स्थिरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। भारत चीन की ओर से बढ़ते हुए खतरे को नहीं भापा और इस खतरे से बचा नजर आया जिसके परिणाम स्वरूप चीन आज विश्व में एक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है। दक्षिण एशिया में चिता के लिए आवश्यक है कि भारत स्वयं को आर्थिक, सैनिक ,सांस्कृतिक रूप से एक शक्तिशाली देश के रूप में स्थापित करें इसी उम्मीद से केवल दक्षिण एशियाई देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया भारत की ओर देखती है।
वैश्विक मामलों की भारतीय परिषद से आई डॉक्टर दीपिका सारस्वत ने परिषद की स्थापना उसके उद्देश्यों को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का वैचारिक पक्ष रखता है। उन्होंने कहा कि डोकलाम विवाद में भारत ने कूटनीतिक स्तर पर बिना लड़े चीन को पीछे धकेल कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि को मजबूत किया उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय में दक्षिण एशिया में भारत की भूमिका मजबूत हुई है।
इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय से आए प्रोफेसर सतीश कुमार ने कहा कि दक्षिण एशिया में भारत की भूमिका का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस क्षेत्र को भारतीय उपमहाद्वीप के नाम से जाना जाता है। आज शक्ति का प्रतिस्थापन पश्चिम से पूर्व की ओर हो रहा है भारत और चीन की गिनती शक्तिशाली राष्ट्रों में होने लगी है। उन्होंने कहा की पंचशील भारत की विदेश नीति का मूल रही है किसी न किसी प्रकार पंचशील ने सदैव भारत की विदेश नीति को प्रभावित किया है। किंतु यह एक कड़वी सच्चाई है कि दक्षिण एशिया के देशों में आपसी व्यापार में निरंतर कमी आई है। भारत और पाकिस्तान के संबंध दक्षिण एशिया में स्थिरता और विकास को प्रभावित करते हैं। दक्षिण एशियाई देशों के संगठन सार्क का सिद्धांत है कि हम एक साथ विकास करेंगे किंतु बाहरी शक्तियों के दखल बढ़ने से इन देशों के संबंधों पर प्रतिकूल असर पढ़ रहा है भारत के संबंध नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों के साथ अच्छे नहीं रह गए हैं वही पाकिस्तान जैसे कुछ असफल राष्ट्र दक्षिण एशिया में स्थिरता के लिए खतरा है।
विशिष्ट वक्ता डॉक्टर संजय मिश्रा ने सार्क में भारत की भूमिका को बहुत बड़ा बताया। उन्होंने कहा कि दक्षिण एशियाई देशों के संगठन सार्क की स्थापना दक्षिण एशिया में विकास की गति को बढ़ाने के लिए हुआ। उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्थिरता आर्थिक विकास की पहली शर्त होती है विश्व की लगभग एक चौथाई आबादी इस क्षेत्र में रहती है इसीलिए इस क्षेत्र का विकास पूरे विश्व के लिए फायदेमंद है। भारत और पाकिस्तान के बीच बिगड़ते संबंध दक्षिण एशिया में स्थिरता और विकास में भाषा के रूप में सामने आ रहे हैं सार्क देशों में भारत आर्थिक राजनीतिक और सैनिक रूप से सर्वाधिक शक्तिशाली है इसीलिए सार्क देशों में इसकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
महाविद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष राम कुमार शर्मा ने कहा कि दक्षिण एशियाई देशों में भारत की भूमिका बड़े भाई की है जिसे वह बखूबी निभा भी रहा है इसका ज्वलंत उदाहरण कोरोना महामारी के बाद उपजे हालातों में देखने को मिला जब भारत ने कोरोना की वैक्सीन अन्य सार्क देशों को उपलब्ध कराई। उन्होंने कहा कि दक्षिण एशियाई देशों के लिए आगे बढ़ने बढ़ने के लिए आपसी मतभेदों को बढ़ाना होगा तभी यह यह क्षेत्र उन्नति कर पाएगा और यह है इस क्षेत्र के लिए ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए अच्छी बात होगी।
प्राचार्य डॉक्टर सुशील उपाध्याय ने कहा कि भारत में होने वाली गतिविधियां दक्षिण एशिया को गहरे तक प्रभावित करती है भारत के लिए वर्तमान में चीन और पाकिस्तान जैसे देश कई चुनौतियां पैदा कर रहे हैं। नेपाल श्रीलंका जैसे देशों के साथ भारत के रिश्ते अस्थिरता के दौर से गुजर रहे हैं जिससे इस क्षेत्र की शांति प्रभावित हो रही है। लेकिन भारत ने खुद को एक मजबूत राष्ट्र के रूप में स्थापित कर यह सा क्षेत्र के अन्य देशों के सामने एक मिसाल प्रस्तुत की है। आयोजन सचिव डॉ धर्मेंद्र कुमार ने आए आए हुए अतिथियों एवं शोधार्थियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
संगोष्ठी का संयोजन डॉ नीशू कुमार ने किया। मंच संचालन डॉ नवीन कुमार ने किया। संगोष्ठी में विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों और शोधार्थियों ने 59 शोध पत्र पढ़े उत्तराखंड सरकार के पर्यटन सलाहकार कैप्टन राजेश कुमार सिंह, मेरठ कॉलेज मेरठ के डॉक्टर संजय कुमार सिंह, देहरादून की डॉक्टर राखी पंचोला, एसआरजी विश्वविद्यालय देहरादून के डॉक्टर दिनेश उपमन्यु ,डॉ धर्मेंद्र कुमार आदि ने अपने विचार रखे
इस मौके पर डॉ नीशू कुमार द्वारा संपादित पुस्तक का विमोचन भी किया गया जिसका विषय दक्षिण एशिया में राजनीतिक स्थिरता में विकास में भारत की भूमिका है। इस अवसर पर महाविद्यालय के संस्थापक अध्यक्ष पं. ईश्वर चंद्र शर्मा उपस्थित थे पुस्तक संपादक डॉ. नीशू कुमार ने बताया कि विगत कुछ समय से दक्षिण एशिया धार्मिक एवं अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र भूमि का विवाद के लिए चर्चा में रहा है। प्राचीन सभ्यताओं में से एक दक्षिण एशिया में प्राचीन सभ्यताओं में से एक जीवंत जीवन शैली के रूप में आज हिंदुस्तान की संरचना के रूप में जीवित है। जहां 21वीं शताब्दी में सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से समस्त वैश्विक मानव समुदाय को एकजुट किया गया वही हितों के टकराव और शक्ति के द्वंद ने एक संघर्ष का दौर पैदा कर दिया है जिसमें आतंकवाद का का वैश्विक रूप मानव समुदाय के सामने प्रस्तुत किया है। इस पुस्तक में दक्षिण एशिया में राजनीतिक स्थिरता एवं विकास में भारत की भूमिका का विभिन्न शोध पत्रों के माध्यम से एक विनम्र मूल्यांकन करने का प्रयास किया गया है।

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