दिवाली के दिन क्यों होती है उल्लू की पूजा

Dharm Haridwar News

उल्लू की पूजा करने से  क्या मिलता है फायदा

हरिद्वार 25 अक्टूबर । दीपावली को देखते हुए दुर्लभ वन्य जंतु उल्लुओं पर मंडराने लगा है बड़ा खतरा दीपावली के दिन तंत्र मंत्र के लिए उल्लुओं के लिए तस्कर भी बड़े पैमाने पर सक्रिय हो गई है दीपावली के दिन उल्लू की पूजा और तंत्र मंत्र में उल्लू के प्रयोग से मा लक्ष्मी की कृपा बरसने के अंधविश्वास के चलते दीपावली पर उल्लू की बढ़ती मांग को देखते हुए वन प्रभाग सक्रिय हो गया है वन प्रभाग ने उल्लुओं के अवैध शिकार की आशंका से अलर्ट जारी कर दिया है और उल्लूओं की तस्करी और अवैध बिक्री रोकने के लिए एक विशेष सुरक्षा दस्त तैयार किया है वन क्षेत्रो में उल्लू की तस्करी रोकने के लिए गश्त बढ़ा दी गई है      

-हिन्दू शास्त्रों में दीपावली के दिन एक विशेष मुहूर्त में उल्लुओं की पूजा और उल्लू के विभिन्न अंगों का तंत्र मंत्र में प्रयोग बताया गया है ऐसा अंधविश्वास है कि दीपावली के दिन यदि खास मुहूर्त में उल्लू की पूजा की जाए और उसके अलग अलग अंगों के साथ तांत्रिक पूजा की जाए तो व्यक्ति को लक्ष्य के साथ साथ कई तरह की सिद्धियां प्राप्त होती है भारतीय ज्योतिष में भी उल्लू पूजा का विधान बताया गया है । ज्योतिषाचार्य प्रतीक मिश्रपुरी का कहना है कि दीपावली पर उल्लू की पूजा के पीछे एक कहानी है। जब  भृगु ऋषि ने दक्ष प्रजापति का यज्ञ संपन्न कराया भगवान शिव उनसे नाराज हो गए।भृगु ऋषि भगवान विष्णु के भी सीने पर लात मारी इससे भगवान विष्णु और लक्ष्मी भी उनसे नाराज हो गई । भृगु संगीता की  में कहा  गया है कि जिस ब्राह्मण के पास यह भृगु संगीता होगी वह लक्ष्मी संपन्न होगा । वही एक कहानी यह भी है कि गौतम ऋषि को अपनी आने वाली संतानों की चिंता हुई । तब गौतम ऋषि के पुत्र प्रथु ने उल्लू तंत्र की संरचना की।उन्होंने कहा कि जो भी उल्लू की पूजा मेरे गोत्र के लोग करेंगे ,उनके पास कभी भी धन की कमी नहीं होगी। इसी लिए गौतम गोत्र के लोग दिवाली की रात को उल्लू की पूजा करते हैं। मगर हम जिंदा उल्लू की पूजा नहीं करते हैं काष्ठ की लकड़ी से बने उल्लू की पूजा करते है मगर तांत्रिक लोग इस दिन उल्लू की तंत्र पूजा करते हैं आंख से वशीकरण उल्लू के पंजे से मारण पंखों से स्तंभन और उल्लू के कई अंगों से सठकर्म का प्रयोग करते हैं कहा जाता है उल्लू अपनी गर्दन 360 डिग्री पर पूरी घुमा लेता है ऐसा जंतु सिर्फ उल्लू है पूरे संसार में और कोई नहीं है मां लक्ष्मी का यह वाहन कहलाया जाता है दिवाली की रात को तांत्रिक लोग उल्लू की बली देते है मगर इस तरीके से धन अर्जित किया जाए तो वह धन किसी काम नहीं आता     

-उलूक़ तंत्र में गौतम ऋषि द्वारा दीपावली के दिन उल्लू की पूजा का विधान बताया गया है इसी तरह तंत्र शास्त्र में भी अलग अलग मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए उल्लू की अलग अलग तरह से पूजा का विधान है ज्योतिषाचार्य प्रतीक मिश्रपुरी का कहना है कि पूजा के लिए उल्लू को मारना उचित नही है तंत्र मंत्र और पूजा के लिए काष्ठ यानी लकड़ी के बने उल्लू की पूजा की जानी चाहिए काष्ठ के उल्लू की पूजा से भी व्यक्ति की हर तरह की मनोकामना की पूर्ति होती हैउल्लू की पूजा सिर्फ दीपावली के दिन ही होती है क्योंकि यह रात्रि और तामसिक प्राणी है इसलिए किसी व्यक्ति को यह दिख भी जाता है तो अपशकुन माना जाता है दीपावली की रात को इसमें असीम शक्ति उत्पन्न हो जाती है कि आपके द्वारा की गई पूजा से आपकी सभी मनोकामना पूर्ण हो जाती है मगर इसका तामसिक प्रयोग ना करें अगर आपको कहीं उल्लू दिख जाए तो उसको प्रणाम करें लेकिन उसको पकड़कर नहीं लाना चाहिए उल्लू कई भाषाओं में बोल सकता है और लोग सोचते हैं इसकी भाषा को समझ कर उनको खजाना मिल जाएगा मगर ऐसा कुछ भी नहीं है सिर्फ लक्ष्मी पूजा मैं उल्लू की पूजा करने का विधान कहा गया है मगर वह भी दूर से पूजा करने का  विधान है       दीपावली की पूजा में उल्लू की पूजा के महत्व को देखते हुए उल्लूओं की मांग बढ़ जाती है उल्लू की तस्करी की आशंकाओं को देखते हुए वन प्रभाग ने भी तस्करी रोकने के लिए कमर कस ली है और तस्करी और शिकार को रोकने के कड़े इंतेजाम किए गए है वन प्रभाग ने अलर्ट घोषित कर दिया है हरिद्वार डीएफओ आकाश वर्मा का कहना है कि दीपावली मैं उल्लू की पूजा को लेकर लोगों में अंधविश्वास है कि लक्ष्मी पूजन में उल्लू का इस्तेमाल करने से शुभ होता है यह अंधविश्वास है इस दौरान उल्लू का शिकार और उसे पकड़ने की घटनाएं लगातार बढ़ जाती है हर वर्ष हमारी तरफ से प्रयास रहता है कि दिवाली के समय में उन क्षेत्रों में जहां पर उल्लू की संख्या ज्यादा है वहां पर हमारे द्वारा पूरी सतर्कता बढ़ती जाती है कि शिकारी इनका शिकार और इनको पकड़ ना पाए इसको देखते हुए हरिद्वार जिले में जितनी भी रेंज है वहां सब को निर्देश दिए गए हैं कि इस पर विशेष ध्यान दिया जाए हमारे द्वारा अलर्ट भी किया गया है     

-दीपावली के वक्त तस्कर पार्क में पूरी तरह से सक्रिय हो जाते हैं और बड़े पैमाने पर उल्लू की तस्करी करते हैं इसी को देखते हुए वन प्रभाग भी सतर्क नजर आ रहा है वन प्रभाग द्वारा उल्लू की तस्करी को रोकने के लिए अलर्ट भी घोषित किया गया है मगर इस अंधविश्वास की वजह से कई उल्लू की जान चली जाती है ज्योतिष शास्त्र सिर्फ उल्लू की पूजा करने का महत्व बताता है और तंत्र सिद्धि के लिए उल्लू को मारना गलत क्योंकि तंत्र सिद्धि करके धन अर्जित करने पर भी धन का लाभ नहीं मिलता है।

-उलूक़ तंत्र में गौतम ऋषि द्वारा दीपावली के दिन उल्लू की पूजा का विधान बताया गया है इसी तरह तंत्र शास्त्र में भी अलग अलग मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए उल्लू की अलग अलग तरह से पूजा का विधान है ज्योतिषाचार्य प्रतीक मिश्रपुरी का कहना है कि पूजा के लिए उल्लू को मारना उचित नही है तंत्र मंत्र और पूजा के लिए काष्ठ यानी लकड़ी के बने उल्लू की पूजा की जानी चाहिए काष्ठ के उल्लू की पूजा से भी व्यक्ति की हर तरह की मनोकामना की पूर्ति होती हैउल्लू की पूजा सिर्फ दीपावली के दिन ही होती है क्योंकि यह रात्रि और तामसिक प्राणी है इसलिए किसी व्यक्ति को यह दिख भी जाता है तो अपशकुन माना जाता है दीपावली की रात को इसमें असीम शक्ति उत्पन्न हो जाती है कि आपके द्वारा की गई पूजा से आपकी सभी मनोकामना पूर्ण हो जाती है मगर इसका तामसिक प्रयोग ना करें अगर आपको कहीं उल्लू दिख जाए तो उसको प्रणाम करें लेकिन उसको पकड़कर नहीं लाना चाहिए उल्लू कई भाषाओं में बोल सकता है और लोग सोचते हैं इसकी भाषा को समझ कर उनको खजाना मिल जाएगा मगर ऐसा कुछ भी नहीं है सिर्फ लक्ष्मी पूजा मैं उल्लू की पूजा करने का विधान कहा गया है मगर वह भी दूर से पूजा करने का  विधान है       दीपावली की पूजा में उल्लू की पूजा के महत्व को देखते हुए उल्लूओं की मांग बढ़ जाती है उल्लू की तस्करी की आशंकाओं को देखते हुए वन प्रभाग ने भी तस्करी रोकने के लिए कमर कस ली है और तस्करी और शिकार को रोकने के कड़े इंतेजाम किए गए है वन प्रभाग ने अलर्ट घोषित कर दिया है हरिद्वार डीएफओ आकाश वर्मा का कहना है कि दीपावली मैं उल्लू की पूजा को लेकर लोगों में अंधविश्वास है कि लक्ष्मी पूजन में उल्लू का इस्तेमाल करने से शुभ होता है यह अंधविश्वास है इस दौरान उल्लू का शिकार और उसे पकड़ने की घटनाएं लगातार बढ़ जाती है हर वर्ष हमारी तरफ से प्रयास रहता है कि दिवाली के समय में उन क्षेत्रों में जहां पर उल्लू की संख्या ज्यादा है वहां पर हमारे द्वारा पूरी सतर्कता बढ़ती जाती है कि शिकारी इनका शिकार और इनको पकड़ ना पाए इसको देखते हुए हरिद्वार जिले में जितनी भी रेंज है वहां सब को निर्देश दिए गए हैं कि इस पर विशेष ध्यान दिया जाए हमारे द्वारा अलर्ट भी किया गया है     

-दीपावली के वक्त तस्कर पार्क में पूरी तरह से सक्रिय हो जाते हैं और बड़े पैमाने पर उल्लू की तस्करी करते हैं इसी को देखते हुए वन प्रभाग भी सतर्क नजर आ रहा है वन प्रभाग द्वारा उल्लू की तस्करी को रोकने के लिए अलर्ट भी घोषित किया गया है मगर इस अंधविश्वास की वजह से कई उल्लू की जान चली जाती है ज्योतिष शास्त्र सिर्फ उल्लू की पूजा करने का महत्व बताता है और तंत्र सिद्धि के लिए उल्लू को मारना गलत क्योंकि तंत्र सिद्धि करके धन अर्जित करने पर भी धन का लाभ नहीं मिलता है।

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