नैनीताल हाई कोर्ट के न्यायाधीश लोकपाल बोले

Haridwar News

हरिद्वार  26 दिसंबर। एक अच्छा जज बनने के लिए एक अच्छा अधिवक्ता होना जरूरी है। तभी वह वादकारियों  की व्यथा को  जान सकता है ।यह विचार उत्तराखंड  उच्च न्यायालय न्यायमूर्ति  लोकपाल सिंह ने अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद  की बैठक  प्रकट किए परिषद की राष्ट्रीय परिषद बैठक के उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्यातिथि लोकपाल सिंह ने विधिक व्यवस्था का पुनर्विन्यास विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि  वर्तमान में हम ल लोगों  को किस स्तर तक न्याय दे पा रहे चिंतन करने पर जोर दिया है।उन्होंने कहा कि कोचिंग सेंटर के माध्यम से ना बनाकर अनुभव के आधार पर जज की नियुक्ति करनी चाहिए। कोचिंग सेंटर के माध्यम से बने जज को न्यायिक प्रक्रिया के ज्ञान का अभाव होता है।जिससे वह वादकारी की समस्याओं, आर्थिक और न्याय की उपलब्धता को नहीं समझ पाता है। जस्टिस ने कहा कि विधि व्यवस्था में मात्र व्यवसाय न होकर वादकारी को न्याय दिलाने का उद्देश्य निहित है। बैठक में परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनायक जे दीक्षितने तीन तत्व सरकार,न्यायपालिका और अधिवक्ता को न्याय व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी बताया है। कहा कि जितने मुकदमे डिस्ट्रिक कोर्ट में उसी के संख्या में हाई कोर्ट में भी पेंडिंग है। उन्होंने कहा कि पहले साढ़े दस बजे कोर्ट शुरू हो जाती थी, मगर आज डेट लेने के लिए लाइन लगी है। अधिवक्ता से आज पूछा जाता है कि महत्वपूर्ण क्या है, छोटे  मम्मी जिओ केसों में समय खराब होता है।  कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई में समय बहुत लिया जाता है। विशिष्ट अतिथि दीक्षित ने कहा कि सुनवाई के लिए आने वाले मेटर बहुत कम है और इसके लिए अधिवक्ता भी जिम्मेदार है। क्योंकि अधिवक्ता पैसे लेकर ही कार्य करते है।जबकि लोगों को न्याय देने का कर्तव्य पालन करना चाहिए।न्यायधीश की नियुक्ति के लिए अच्छे लोगों में रुचि जाग्रत करनी पड़ेगी। इसके लिएन्यायपालिका को व्यवसाय बनाने के लिए अधिवक्तयों को प्रेरित करना होगा। कहा किअधिवक्तयों को कार्य करने के तरीकों के बारे में सोचना पड़ेगा और न्याय दिलाने के लिए हमे फीस की परवाह न कर वादकारी का हित सोचना होगा।बैठक में पधारे विशिष्ट अतिथि व बार कौंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन मिश्रा ने कहा कि  न्याय व्यवस्था में सुधार के लिए परिषद के विचारों पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया बहुत कुछ करेगी। कहा कि अधिवक्त को कोचिंग क्लास की व्यवस्था किये जाने की आवश्यकता है। जिससे अच्छे वकीलों का निर्माण किया जाए। सरकार द्वारा कानूनी सहायता पर किये जा रहे खर्च को आधारहीन बताते हुए मात्र पांच प्रतिशत भी परिणाम नहीं मिलने की बात कही। उन्होंने कहाकि परिषद के मार्गदर्शन से विधि शिक्षा व व्यवसाय व्यवस्था में सुधार होगा। कहा कि ऐसे अधिवक्ता जो पैसा लेकर केस नही चलाते वह चिंता का विषय है। कहा कि वह लीगल एजुकेशन में कुछ कमियां महसूस करते है। यही वजह है,कि बीसीआई ने तीन साल तक नया विधि कॉलेज नही खोलने देंगे।उचित सुविधा नही होने वाले कॉलेज का आकस्मिक निरीक्षण करेंगे। टीम में अनुभवी व योग्य वकीलों को भी भेजा जाएगा।कहा कि बीसीआई ने हाल ही में कुछ निर्णय लिए है, जैसे10 साल की वकालत के बाद दो हफ्ते की ट्रेनिग लेनी होगी। ट्रेनिंग रिटायर्ड जज और वकील देंगे।पांच साल में 40 दिन की ट्रेडिंग नही लेने उनके रिन्यूवल नही होंगे।कोचिंग इंस्टिट्यूट खोलने के हर राज्य में प्रयास करेंगे।कार्यक्रम में परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष एमडी नारगुडे ने अधिवक्ता परिषद के संस्थापक दत्तोपंत ठेंगड़ी का जीवन परिचय दिया। इससे पूर्व वन्देमातरम गीत एवं दीप प्रज्वलन किया गया। इसी बीच मानव सेवा उत्थान समिति से स्वामी कमलेशानन्द ने परिषद की ओर से गरीबों लोगो निश्शुल्क कानूनी सहायता की भूरि सराहना की।उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष जानकी सूर्या व कार्यकारी अध्यक्ष संजय जैन ने बैठक में पहुँचे अतिथियों व अधिवक्ताओं का आभार जताया। परिषद के क्षेत्रीय मंत्री चरण सिंह त्यागी ने मंच संचालन किया। इस दौरान मुख्यतातिथि व विशिष्ट अतिथियों को पुष्गच्छ देकर सम्मानित किया गया।  बैठक में, राष्ट्रीय महामंत्री डी भरत,राष्ट्रीय संग़ठन मंत्री जॉय दीप राय, राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुमन चौहान, प्रदेश मंत्री अनुज शर्मा, संदीप टण्डन, कुलदीप सिंह, राजेश राठौर, कुशलपाल सिंह चौहान, एसके भामा,संजय चौहान, प्रणव बंसल, अरविंद श्रीवास्तव, अमरीष, सुशील सिंघल, नितिन गर्ग, आदेश चौहान, मुदित अग्रवाल व नामित शर्मा और हिमांशु सैन मौजूद रहे।

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