समाज में बाल श्रम जैसी बुराई को मिटाने का ले संकल्प, 12 जून विश्व बाल श्रम निषेध दिवस

Haridwar News

हरिद्वार। हरिद्वार के मनोवैज्ञानिक डाॅ० शिव कुमार ने कहाॅ कि श्रम जीवन का आधार है। जीवन मे किए गये कर्मो के आधार पर विफलता तथा सफलता निर्भर करती है। जिससे प्रारब्ध का निर्माण होता है। आधुनिक जीवन मे श्रम करना ही कर्म का प्रतिरूप है लेकिन सामाजिक एवं औद्योकि विकास के लिए श्रम करने के लिए एक नियत आयु अथवा अवधि निश्चित है। कर्मशास्त्र के अनुसार नियत आयु अथवा अवधि में किया गया श्रम सफलता के रूप में फलीभूत होता है। इसके विपरीत किया गया श्रम असफलता के साथ अनेक दुस्वारियाॅ एवं परेशानियाॅ साथ लाता है। जिनसे संघर्ष करते हुए व्यक्ति अपने जीवन को दांव पर लगा देता है। उन्होने कहाॅ कि आज सामाजिक परिवेश कर्म प्रधान न बनकर केवल धन प्रधानता के रूप में मान्यता प्राप्त है। सामाजिक मान-मर्यादाओं का हनन करते हुए केवल धन की प्रधानता ही समाज मे स्वीकार्य बन गई है। जिसके कारण अव्यवस्था तथा सामाजिक ढांचा विघटित होता जा रहा है। जो सभी के लिए चिन्ता का विषय है। आज हम सभी विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मना रहे है। इस अवसर पर हमस ब को यह प्रण लेना चाहिए कि सामाजिक ढांचे के विघटन को रोकने तथा नियत आयु वर्ग से पूर्व अथवा बाल्यावस्था वाले बच्चों के द्वारा अपनी श्रम कराये जाने का विरोध करते हुए समाज के अन्य वर्गो के लोगों को भी इस हेतु सहयोग करने के लिए प्रेरित करेगे। घर-परिवारों मे बाल्यपन की अवस्था मे श्रम करने वाले गरीब एवं असहाय परिवार के बच्चों को इस सामाजिक बुराई से बचाकर शिक्षा प्राप्ति के लिए प्रेरित करेगे तथा सरकार की ओर से चलाएं जा रही कल्याणकारी योजनाओं से परिचित कराते हुए इस श्रेष्ठ कर्म मे अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने का प्रयास करेगे। इस बाल श्रम निषेध दिवस पर समाज के प्रति आपकी यह अनुपम भेट हो सकती है।

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