पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तराखंड श्री तीरथ सिंह रावत जी पधारे परमार्थ निकेतन

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माँ गंगा का पूजन अर्चन कर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी से दूरभाष पर की वार्ता
श्री रावत जी ने परमार्थ गुरूकुल के आचार्यो और ऋषिकुमारों के साथ आश्रम दर्शन किया

पितृपक्ष का शुभारम्भ

पितृ तर्पण, पेड़ अर्पण-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश, 20 सितम्बर। आज प्रातःकाल परमार्थ निकेतन में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री श्री तीरथ सिंह रावत जी पधारे। उन्होंने परमार्थ गंगा तट पर माँ गंगा का पूजन-अर्चन कर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी से दूरभाष पर वार्ता कर आशीर्वाद लिया।
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने माननीय श्री तीरथ सिंह रावत जी के उत्तम स्वास्थ्य हेतु मंगल कामनायें करते हुये कहा कि हिमालय पुत्र श्री तीरथ सिंह रावत जी सदा हिमालय की तरह देश सेवा और हिमालय की सेवा में लगे रहें। वे सबसे जुड़ें रहते हंै और सब को जोड़कर रखते हैं यही सबसे बड़ी सेवा है, इसी के माध्यम से आने वाली पीढ़ियाँ भारतीय संस्कृति को और बेहतर ढ़ंग से समझ पायेगी।
स्वामी जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की प्राचीनतम संस्कृतियों में से एक है, जो सदियों से माँ गंगा की गोद और हिमालय की छत्रछाया में विकसित हो रही है। भारत की सभ्यता और संस्कृति में विविधता में एकता के साथ समृद्ध सांस्कृतिक विरासत भी शामिल है। भारतीय संस्कृति समस्त मानवता का कल्याण चाहती है। हम सभी भारतीयों को मिलकर ही हमारी प्रकृति, पर्यावरण और मानवता के संरक्षण के लिये कार्य करना होगा।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने पितृपक्ष के शुभारम्भ के अवसर पर देशवासियों को पितृ तर्पण, पेड़ अर्पण का संदेश दिया।
सनातन संस्कृति में पितृपक्ष का बड़ा ही महत्व है। पितृ पक्ष में पितरों का श्राद्ध (तर्पण) किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान पितरों के नाम से पूजन, अर्चन, दान और पौधों के रोपण से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। पितृ पक्ष की शुरुआत भाद्र मास में शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से होता है और आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि तक पितृ पक्ष रहता है।
शास्त्रों के अनुसार पितरों का स्थान पूजनीय है, श्राद्ध कर्म के पश्चात जरूरतमंदों की सहायता करने से भी पितरों को पुण्य प्राप्त होता है।

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