विदेश मंत्रालय के सचिव श्री अखिलेश मिश्रा पतंजलि योगपीठ पहुँचे

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आयुर्वेद में वैज्ञानिक तथ्य आधारित गहन अनुसंधान पतंजलि योगपीठ में ही संभव : सचिव, विदेश मंत्रालय

पतंजलि के माध्यम से हमारी प्राचीन ऋषि संस्कृति पुष्पित व पल्लवित हो रही है: श्री मिश्रा

वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित दिव्य औषधियों के सम्मिश्रण से चमत्कारिक औषधियों का हो रहा निर्माणः पूज्य आचार्य जी महाराज

हरिद्वार, विदेश मंत्रालय के सचिव श्री अखिलेश मिश्रा अपनी धर्मपत्नी के साथ आज पतंजलि योगपीठ पहुँचे। पतंजलि पहुँचने पर परम पूज्य आचार्य बालकृष्ण जी महाराज तथा स्वामी परमार्थदेव जी ने अतिथिगण का स्वागत किया। सचिव महोदय ने पतंजलि के विविध सेवा प्रकल्पों के माध्यम से संचालित सेवाकार्यों का अवलोकन किया। उन्होंने पतंजलि अनुसंधान संस्थान स्थित ड्रग डिस्कवरी विभाग, पतंजलि साहित्यानुसंधान विभाग तथा पतंजलि औषधीय उद्यान का भ्रमण कर कहा कि आयुर्वेद के क्षेत्र में इतना गहन अनुसंधान योग-आयुर्वेद की सबसे बड़े संस्थान पतंजलि योगपीठ के माध्यम से ही संभव है। इस अवसर पर पतंजलि योगपीठ स्थित आयुर्वेद भवन में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में श्री मिश्रा ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि पतंजलि समाजसेवा के साथ-साथ राष्ट्रसेवा व राष्ट्रोत्थान के महत्वपूर्ण कार्य में संलग्न है।
उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वज ऋषि-मुनियों की धरोहर प्राचीन पाण्डुलिपियों का संरक्षण व संवर्द्धन कर पूज्य आचार्य जी महाराज एक दैवीय कार्य कर रहे हैं। माननीय सचिव महोदय ने प्राचीन ऋषि प्रणाली के अन्तर्गत संचालित शिक्षा, संस्कृति व संस्कार के दिव्य केन्द्र वैदिक गुरुकुलम् तथा वैदिक कन्या गुरुकुलम् के यज्ञीय वातावरण में संचालित केन्द्रों की सराहना करते हुए कहा कि पतंजलि के माध्यम से हमारी प्राचीन ऋषि संस्कृति पुष्पित व पल्लवित हो रही है।
इस अवसर पर पूज्य आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि पतंजलि ने आयुर्वेद को पूरे विश्व में पुनः प्रतिष्ठापित किया है। कोरोनाकाल में कोरोनिल इसका प्रामाणिक उदाहरण है। हमने वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित दिव्य औषधियों के सम्मिश्रण से लीवोग्रिट, बीपी ग्रिट, मधुग्रिट, इम्यूनोग्रिट, थायरोग्रिट, प्रोस्टोग्रिट, पीड़ानिल गोल्ड, सिस्टोग्रिट, एसिडोग्रिट, कांचनार घनवटी, लीथोम, ब्रोंकोम, लीवामृत एडवांस, लौकी घनवटी एसिडोग्रिट तथा कंठामृत जैसी प्रामाणिक औषधियों का निर्माण किया है। ये औषधियाँ वैज्ञानिक पैरामीटर्स के आधार पर निर्मित की गई हैं तथा इनके सकारात्मक परिणामों का लाभ जनसामान्य को मिलेगा। आचार्य जी ने कहा कि कोरोनाकाल में लोगों ने आयुर्वेद का लोहा माना है। कोरोनाकाल में जहाँ पूरा विश्व त्रहिमाम कर रहा था वहीं हमारे पारम्परिक योग व आयुर्वेद के सामने कोरोना बौना साबित हुआ। हमने आयुर्वेद के प्रयोगों से हेपेटाइटिस रोगियों को निगेटिव करके दिखाया है।
कार्यक्रम में पतंजलि विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति प्रो. महावीर जी, स्वामी परमार्थ देव जी, पतंजलि विश्वविद्यालय के प्राध्यापकगण तथा छात्र-छात्रएँ उपस्थित रहे।

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