उत्तराखंड में लोह महिला के नाम से प्रसिद्ध थी इंदिरा हृदयेश

Uttarakhand

अपने सिद्धांतों के लिए दृढ़ निश्चय ही वाली महिला इंदिरा
देहरादून
उत्तराखंड कांग्रेस की दिग्गज नेता और नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश राज्य में लौह महिला के नाम से प्रसिद्ध थी उनके निधन से राज्य में शोक की लहर छा गई वह राज्य की सबसे ताकतवर महिला नेता थी उनका राजनीतिक अनुभव उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की राजनीति दोनों को लेकर था वे उत्तर प्रदेश में 1974 से उत्तराखंड राज्य बनने सन 2000 तक विधान परिषद की वरिष्ठ सदस्य रही जब आज सुबह उत्तराखंड में दिल्ली के उत्तराखंड सदन से उनकी मृत्यु की खबर आई तो किसी को विश्वास नहीं हुआ आज सुबह उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी थी और 10:30 बजे सुबह का निधन हो गया उनका शव हल्द्वानी लाया गया दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हुआ उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी राहुल गांधी प्रियंका गांधी उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा हरीश रावत प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत समेत कई नेताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विकास में उनके योगदान को याद किया नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश बीते दिन दिल्ली में कांग्रेस की बैठक में शामिल होने गई थी और दिल्ली स्थित उत्तराखंड सदन में उनकी अचानक तबीयत खराब हो गई थी हल्द्वानी में उनके आवास पर जन सैलाब उमड़ पड़ा। उत्तर प्रदेश से लेकर उत्तराखंड के विभाजन के बाद भी राजनीति में इंदिरा हृदयेश का विशेष योगदान रहा।
इंदिरा हृदयेश का जन्म 7 अप्रैल 1941 को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में हुआ था अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत उन्होंने 1974 में उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य का सदस्य बनकर शुरू की तब से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा वह जनसेवा और बेबाक बयानबाज़ी के लिए जानी जाती थी। इंदिरा हृदयेश ने समय के हिसाब से राजनीति का हर उतार चढ़ाव देखा।
1974 से 1980 तक उत्तर प्रदेश विधानसभा परिषद की सदस्य रहने के बाद इंदिरा हृदयेश दूसरी बार 1986 से 1992 तक उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य बनी, इसके बाद 1992 से 1998 तक विधान परिषद के सदस्य फिर से निर्वाचित हुई और 1998 से 2000 तक एमएलसी रहने के बाद उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड अलग हो गया। उत्तराखंड अलग होने के बाद इंदिरा हृदयेश प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनी।उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2002 मे कांग्रेस की सरकार बनने के बाद इंदिरा हृदयेश नैनीताल सरकार में सबसे ताकतवर मंत्री बनी 2012 से 2017 तक फिर हल्द्वानी से चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस सरकार में भारी-भरकम विभागों के साथ मंत्री बनी, 2017 में कांग्रेस चुनाव हार गई लेकिन विपरीत परिस्थितियों में भी इंदिरा हृदयेश हल्द्वानी सीट जितने में कामयाब रहीं और नेता प्रतिपक्ष के रूप में कांग्रेस पार्टी का दायित्व संभाल रही थी। वे खाटी महिला नेताओं में गिनी जाती थी
उत्तर प्रदेश की शिक्षक राजनीति से उन्होंने अपना राजनीतिक सफर तय किया और वे जनप्रिय नेता थी उनके राजनीतिक गुरु उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ शिक्षक नेता ओम प्रकाश शर्मा और देश की राजनीति के दिग्गज राजनेता पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा और नारायण दत्त तिवारी थे उनका हर राजनीतिक दल में पूर्ण सम्मान था वे दलीय राजनीति से बहुत ऊपर थी और अपनी राजनीतिक विचारधारा के प्रति बहुत दृढ़ थी

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