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परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और जल शक्ति मंत्री, भारत सरकार, श्री सी आर पटिल जी के मध्य दिल्ली में हुई भेंटवार्ता.

पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और जल शक्ति मंत्री भारत सरकार श्री सी आर पाटिल जी की नदियों के संरक्षण के विषयों पर एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में नदियों के प्रदूषण से मुक्ति, उनके संरक्षण और जलवायु संकट से निपटने के उपायों पर विशद् चर्चा हुई।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने नदियों के महत्व और उनके संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, नदियाँ हमारे जीवन का अभिन्न अंग हैं। नदियों का संरक्षण न केवल पर्यावरण के लिए जरूरी है, बल्कि यह हमारे समाज और संस्कृति की धरोहर है। अगर हम अपनी नदियों को बचाते हैं, तो हम आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवनदायिनी संसाधन छोड़ सकते हैं।
स्वामी जी ने कहा कि आस्था एक ऐसी शक्ति है, जो व्यक्ति के विचारों, दृष्टिकोण और व्यवहार को प्रभावित करती है। जब हम किसी चीज में दृढ़ विश्वास रखते हैं, तो वह हमारे कर्मों में परिलक्षित होता है। आस्था के माध्यम से हम सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं, क्योंकि यह हमारी मानसिकता और प्राथमिकताओं को पुनः व्यवस्थित करने की क्षमता रखती है। आस्था हमें अपने कार्यों और निर्णयों में सही मार्ग दिखाती है, जिससे समाज में अच्छे आचरण और व्यवहार को बढ़ावा मिलता है। इस अवसर पर स्वामी जी ने नमामि गंगे और परमार्थ निकेतन द्वारा शुरू की गयी गंगा आरती जागरूकता ट्रेनिंग के माध्यम से व्यवहार परिवर्तन कि विषय में जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि नदियाँ हमारे जीवन का आधार हैं। नदियाँ न केवल प्राकृतिक संसाधन हैं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति और जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा भी हैं। यमुना, गंगा, और अन्य नदियाँ जीवनदायिनी हैं, जो जल, खाद्य, कृषि और उद्योग के लिए आवश्यक संसाधन प्रदान करती हैं। इसके अलावा, नदियाँ हमारे सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न अंग हैं, जिनका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व भी है।

लेकिन, पिछले कुछ दशकों में प्रदूषण, शहरीकरण, औद्योगिकीकरण और अनियंत्रित जल उपयोग ने इन नदियों को संकट में डाल दिया है। नदियाँ प्रदूषित हो रही हैं, जल की गुणवत्ता खराब हो रही है और इनके पारिस्थितिकी तंत्र को भारी नुकसान हो रहा है इसलिये सरकार व समाज दोनों को मिलकर नदियों के संरक्षण के लिये कार्य करना होगा।
श्री सी आर पटिल जी ने नदियों के प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार और समाज के सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, नदियाँ हमारी प्राकृतिक धरोहर हैं और उनके संरक्षण के लिए हर नागरिक को जिम्मेदारी लेनी होगी। यह हमारी संस्कृति और परंपरा का हिस्सा हैं, और इनका संरक्षण हमारे सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।
श्री सी आर पटिल जी ने इस अवसर पर यह भी कहा कि नदियों के प्रदूषण से मुक्ति के लिए सरकार प्रभावी कदम उठा रही है परन्तु इसके साथ ही समाज के हर वर्ग को जागरूक करना भी अत्यंत आवश्यक है। सभी मिलकर प्रयास करेंगे, तो हम अपनी नदियों को प्रदूषण से मुक्त कर सकते हैं ताकि उनका स्वच्छ जल आने वाली पीढ़ियों को प्रदान हो सके।
स्वामी जी ने माननीय जल शक्ति मंत्री श्री सी आर पाटिल जी को रूद्राक्ष का दिव्य पौधा भेंट किया।

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