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उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह : बन गए हर किसी के मीत,लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्ति) गुरमीत सिंह की उत्तराखंड की राज्यपाल के रूप में यात्रा के वह पल जो हमेशा याद किए जाएंगे

उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह : बन गए हर किसी के मीत,
लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्ति) गुरमीत सिंह की उत्तराखंड की राज्यपाल के रूप में यात्रा के वह पल जो हमेशा याद किए जाएंगे

लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत ने 15 सितंबर 2021 को पद संभाला था। इस साल जुलाई में उन्होंने उत्तराखंड के इतिहास में सबसे अधिक समय तक राज्यपाल रहने का रिकॉर्ड बनाया था। अब उनकी जगह भारत सरकार ने नए राज्यपाल की नियुक्ति कर दी और उनकी विदाई एक राज्यपाल के रूप में उत्तराखंड से तय है परंतु उनके उत्तराखंड में राज्यपाल के रूप में बिताए गए हर पल हमेशा याद रहेंगे जिन्होंने उन्हें हरेक का मीत बना दिया
उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने अपने पांच वर्षों के कार्यकाल के दौरान देवभूमि की जनता के दिलों पर एक अमिट छाप छोड़ी। एक अनुशासित सैन्य कमांडर की कर्तव्यनिष्ठा और एक संवेदनशील अभिभावक के वात्सल्य का अनूठा संगम उनके व्यक्तित्व में झलकता था। यही वह खास गुर था, जिसने लोकभवन की औपचारिक सीमाओं को लांघकर उन्हें हर उत्तराखंडी का मीत बना दिया।
उन्होंने 15 सितंबर 2021 को पद संभाला था। इस साल जुलाई में उन्होंने उत्तराखंड के इतिहास में सबसे अधिक समय तक राज्यपाल रहने का रिकॉर्ड बनाया था। 15 सितंबर को उनके कार्यकाल के पांच वर्ष पूरे हो गए थे। उन्होंने पांच मिशन रिवर्स पलायन, हॉर्टिकल्चर व ऑर्गेनिक फार्मिंग, महिला सशक्तीकरण, एआई व तकनीकी के साथ ही क्रांति (मौन पालन, अरोमा, होम स्टे, स्वयं सहायता समूह, मिलेट्स, स्टार्टअप) पर फोकस किया।

सीमांत से सीधा संवाद और आमजन से जुड़ाव

लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) देश के प्रथम गांव माणा में रात्रि प्रवास करने वाले पहले राज्यपाल बने। वाइब्रेंट विलेज अभियान को धरातल पर उतारते हुए उन्होंने सीमांत गांवों में रहने वाले प्रहरियों के सुख-दुख को बेहद करीब से साझा किया। 57 में से 32 वाइब्रेंट विलेज में वे खुद भ्रमण करके आए। युवाओं का भविष्य संवारना हो, मातृशक्ति को आत्मनिर्भर बनाना हो या पूर्व सैनिकों के कल्याण की बात, वे हर वर्ग के लिए सदैव तत्पर रहे। उनके कार्यकाल में लोकभवन के द्वार आम जनता के लिए सहजता से खुले, जिससे लोकभवन सही मायनों में जन-आकांक्षाओं का केंद्र बना।

उच्च शिक्षा में शोध और तकनीक का नया दौर

शिक्षा के क्षेत्र में उनकी दूरदर्शिता ने राज्य के विश्वविद्यालयों की दिशा बदल दी। उन्होंने वन यूनिवर्सिटी-वन रिसर्च की अभिनव पहल शुरू कराई, जिससे हर संस्थान किसी विशिष्ट क्षेत्रीय व वैश्विक समस्या के समाधान पर केंद्रित हुआ। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), उभरती तकनीकों और नवाचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ उन्होंने देवभूमि को नशामुक्त बनाने के लिए प्रदेशव्यापी जन-जागरूकता अभियान को अपना मुख्य मिशन बनाया।

आधुनिक सोच, आध्यात्मिक अंतर्मन और संयुक्त प्रयास

वे जितने आधुनिक और तकनीक-समर्थक रहे, उतने ही गहरे आध्यात्मिक स्वभाव के धनी भी। हिमालय की सांस्कृतिक विरासत और देवभूमि की आस्था के प्रति उनका अनुराग सर्वविदित था। इस प्रेरणादायी यात्रा में उनकी धर्मपत्नी व प्रथम महिला गुरमीत कौर का योगदान भी उल्लेखनीय रहा। उन्होंने प्रदेशभर के स्वयं सहायता समूहों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सामाजिक मंचों पर उपस्थित होकर महिलाओं के हौसले और आत्मविश्वास को एक नई उड़ान दी। शिव के उपासक राज्यपाल ने लोकभवन में शिव का मंदिर भी बनवाया।
उत्तराखण्ड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने राज्यपाल के पद का दायित्व संभालने के बाद से प्रदेश के विकास और जनकल्याण को केंद्र में रखते हुए अनेक महत्वपूर्ण पहल की हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल की शुरुआत में रिवर्स पलायन, महिला सशक्तीकरण एवं बालिका शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं तकनीक, जैविक एवं प्राकृतिक कृषि तथा वेलनेस को पांच प्रमुख मिशन के रूप में निर्धारित किया। पिछले पांच वर्षों में इन प्राथमिकताओं को शिक्षा, शोध, तकनीक, स्वास्थ्य, पर्यावरण, युवा, महिला सशक्तीकरण और जनभागीदारी से जोड़ते हुए अनेक अभिनव प्रयास किए गए हैं।

राज्यपाल ने कुलाधिपति के रूप में उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, पारदर्शिता, शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ‘वन यूनिवर्सिटी-वन रिसर्च’ जैसी पहल शुरू की और शोध को केवल अकादमिक गतिविधि तक सीमित न रखते हुए उसे धरातल पर लागू करने पर विशेष जोर दिया गया। उच्च शिक्षा की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखण्ड कॉलेज एफिलिएशन पोर्टल विकसित किया गया। इससे महाविद्यालयों और संस्थानों की संबद्धता प्रक्रिया ऑनलाइन और समयबद्ध हुई। कुलपति चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए इंटरैक्शन की वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू की गई।

विश्वविद्यालयों के बीच बेहतर संवाद और उपलब्धियों के आदान-प्रदान के लिए ‘यूनिवर्सिटी कनेक्ट उत्तराखण्ड’ तथा निजी विश्वविद्यालयों के लिए ‘यूनिसंगम’ मोबाइल एप शुरू किए गए। पहली बार निजी विश्वविद्यालयों को भी एक साझा मंच पर लाकर प्रदेश के विकास में उनकी भूमिका को मजबूत करने के लिए नियमित संवाद की व्यवस्था विकसित की गई।

तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दिशा में नई पहल

राज्यपाल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को उत्तराखण्ड के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम माना और इसे लोक भवन की कार्यप्रणाली से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और सामाजिक क्षेत्र तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए। लोक भवन देहरादून में एआई आधारित स्मार्ट ऑटोमेशन सिस्टम, ई-पास, ऑनलाइन मैनेजमेंट सिस्टम, लाइब्रेरी मैनेजमेंट सिस्टम, डिजिटल डैशबोर्ड और ई-ऑफिस जैसी व्यवस्थाएं विकसित की गईं। इससे लोक भवन की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी, आधुनिक और प्रभावी हुई। लोक भवन को डिजिटल रूप से लोगों से जोड़ने के लिए वर्चुअल टूर तैयार किया गया। इसके माध्यम से लोग बोनसाई गार्डन, नक्षत्र वाटिका, राजप्रज्ञेश्वर महादेव मंदिर, आरोग्यधाम, राजलक्ष्मी गौशाला और पुस्तकालय सहित राजभवन परिसर की विभिन्न विशेषताओं का डिजिटल भ्रमण कर सकते हैं।

लोक भवन देहरादून और नैनीताल की परिसंपत्तियों में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए इन्वेंटरी मैनेजमेंट सिस्टम विकसित किया गया तथा सामग्री पर बार कोड लगाए गए। ‘गार्गी नारी शक्ति’ AI चैटबॉट महिलाओं को कानूनी सहायता, करियर, वित्तीय साक्षरता, सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में अभिनव प्रयास है। वहीं ‘इटरनल गुरु’ AI चैटबॉट के माध्यम से श्री गुरु ग्रंथ साहिब की शिक्षाओं और गुरबाणी के आध्यात्मिक संदेश को तकनीक के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।

‘उत्तराखण्ड एआई मिशन-2025’ की शुरुआत के साथ AI को प्रदेश की विकास आवश्यकताओं से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। इसके बाद ‘AI-for-All’ जैसी पहल के माध्यम से विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को एआई की आधुनिक शिक्षा और रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण से जोड़ने का प्रयास किया गया।

इसी क्रम में ‘ऑपरेशन साथी’, ‘आरोही इन्क्यूबेटर’ और AI थीम रुम की शुरुआत की गई। ऑपरेशन साथी के माध्यम से प्रदेश के सभी 13 जिलों में विद्यार्थियों, युवाओं, शोधकर्ताओं, महिला उद्यमियों, किसानों, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय नवप्रवर्तकों की प्रतिभा एवं विचारों की पहचान की जा रही है। आरोही इन्क्यूबेटर इन विचारों को प्रोटोटाइप, मार्गदर्शन, शोध, निवेश और स्टार्टअप के अवसरों से जोड़ने का माध्यम बन रहा है। AI थीम रुम के माध्यम से प्रदेश में हो रहे AI, शोध, स्टार्टअप और तकनीकी नवाचारों को एक साझा मंच प्रदान किया गया है।

युवाओं और सीमांत क्षेत्रों तक पहुंच

5 वर्षों में राज्यपाल ने प्रदेश के सभी जिलों का दौरा कर अधिकारियों के साथ बैठक और स्थानीय लोगों से संवाद किया। सीमांत क्षेत्रों और वाइब्रेंट विलेज पर विशेष ध्यान देते हुए राज्यपाल ने 51 वाइब्रेंट विलेज में से 30 गांवों का दौरा किया। इन क्षेत्रों में स्थानीय लोगों, युवाओं और पूर्व सैनिकों से संवाद कर उनकी आवश्यकताओं और संभावनाओं को समझने का प्रयास किया गया। युवा प्रतिभाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने, सेना और पूर्व सैनिकों के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करने तथा विद्यार्थियों को देश के विभिन्न हिस्सों से परिचित कराने के लिए राष्ट्रीय एकता, सद्भावना और शैक्षिक भ्रमण जैसी गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया गया।

महिला सशक्तीकरण और बालिका शिक्षा

महिला सशक्तीकरण और बालिका शिक्षा राज्यपाल की प्राथमिकताओं में लगातार प्रमुख रहे हैं। लोक भवन परिसर में बालिका आत्मरक्षा एवं कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य बालिकाओं को आत्मरक्षा, डिजिटल शिक्षा और भविष्य के रोजगार के लिए आवश्यक कौशल उपलब्ध कराना है। महिला उद्यमिता, वित्तीय साक्षरता, स्वास्थ्य, सुरक्षा और नेतृत्व से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने पर जोर दिया गया। AI आधारित ‘गार्गी नारी शक्ति’ पहल इसी प्रयास को तकनीक से जोड़ती है।

स्वास्थ्य और जनभागीदारी

राज्यपाल ने टीबी मुक्त भारत अभियान में सक्रिय भूमिका निभाते हुए स्वयं भी निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों की सहायता की। उनके मार्गदर्शन में बड़ी संख्या में निक्षय मित्रों को इस अभियान से जोड़ा गया। बाद के चरण में टीबी उन्मूलन के लिए विशेष अभियान चलाकर जनभागीदारी को और मजबूत किया गया। लोक भवन में टीबी, मानसिक स्वास्थ्य, ब्रेस्ट कैंसर, आर्थराइटिस, आयुर्वेद, मर्म चिकित्सा, वित्तीय एवं कर साक्षरता सहित विभिन्न जनोपयोगी विषयों पर जागरूकता कार्यक्रम और सेमिनार आयोजित किए गए। वेलनेस की दिशा में राजभवन परिसर में आरोग्यधाम की स्थापना की गई, जहां पंचकर्म, मर्म चिकित्सा और फिजियोथेरेपी जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय से स्वास्थ्य एवं वेलनेस को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।

ग्रीन लोक भवन की दिशा में पहल

पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए लोक भवन परिसर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सहित विभिन्न प्रयास किए गए। वर्षा जल संरक्षण से लगभग 200 किलोलीटर पानी के संरक्षण एवं बचत की व्यवस्था की गई। हरियाली बढ़ाने के साथ जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता का संदेश भी दिया गया। लोक भवन परिसर में बहुउद्देशीय भवनों के निर्माण की नींव सुगम एवं प्रभावी कार्यप्रणाली की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। आधुनिक सुविधाओं से युक्त इन ग्रीन बिल्डिंग्स का निर्माण पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक पहाड़ी वास्तुकला को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। इससे विकास के साथ उत्तराखण्ड की स्थानीय पहचान और पर्यावरणीय संतुलन भी कायम रहेगा।
आध्यात्मिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को जोड़ते हुए ‘नक्षत्र वाटिका’ की स्थापना की गई, जिसमें 27 नक्षत्रों से संबंधित 27 पौधों को स्थान दिया गया है। लोक भवन के बोनसाई गार्डन का भी विस्तार किया गया, जिसमें 500 से अधिक पौधों का संरक्षण किया जा रहा है। गौशाला की स्थापना के साथ भारतीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के मूल्यों को भी परिसर से जोड़ा गया है।

जनसमस्याओं के समाधान और सैनिकों के प्रति विशेष संवेदनशीलता

पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों की समस्याओं के समाधान के लिए लोक भवन में शिकायत निवारण अधिकारी की व्यवस्था की गई। इसके साथ ही समय-समय पर जनता मिलन कार्यक्रम आयोजित कर राज्यपाल ने स्वयं लोगों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को उनके समाधान के निर्देश दिए। प्रदेश में स्थित केंद्रीय संस्थानों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए उनके प्रमुखों के साथ नियमित बैठकें की गईं। इससे केंद्रीय संस्थानों की विशेषज्ञता और संसाधनों को उत्तराखण्ड के विकास से जोड़ने का प्रयास किया गया।

लोक भवन में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए नियमित परिवार मिलन कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें उनकी व्यक्तिगत एवं कार्यालयी समस्याओं को सुना गया और उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्मिकों को सम्मानित किया गया। इससे संस्थान में टीम भावना और पारिवारिक वातावरण को मजबूत करने का प्रयास हुआ।

सेवा से संकल्प और संकल्प से सिद्धि की ओर

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) की पांच वर्ष की यात्रा में संवैधानिक दायित्वों के साथ-साथ सेवा, संवाद, तकनीक, नवाचार और जनभागीदारी पर विशेष जोर दिखाई देता है। उत्तराखण्ड की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शिक्षा से लेकर AI, शोध से लेकर स्टार्टअप, स्वास्थ्य से लेकर वेलनेस, महिला सशक्तीकरण से लेकर युवा प्रतिभा और पर्यावरण संरक्षण से लेकर सीमांत क्षेत्रों तक अनेक पहल की गई हैं।
5 वर्षों की यात्रा में राज्यपाल का उद्देश्य यही रहा है कि उत्तराखण्ड की प्रतिभा, संसाधन और संभावनाएं प्रदेश के विकास की शक्ति बनें और देवभूमि उत्तराखण्ड को विकसित भारत@2047 की यात्रा में अपनी विशिष्ट भूमिका निभाने वाला राज्य बनाया जा सके।

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