मैक्स के डॉक्टर साहब की सलाह, हार्ट अटैक के बाद सुरक्षित रिकवरी के लिए जरूरी है सही देखभाल और नियमित फॉलो-अप
हार्ट अटैक के बाद सुरक्षित रिकवरी के लिए जरूरी है सही देखभाल और नियमित फॉलो-अप
हरिद्वार: हार्ट अटैक का असर केवल मरीज पर ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार पर पड़ता है, खासकर जब यह परिवार के कमाने वाले या गृहिणी को प्रभावित करता है। हालांकि, सही समय पर इलाज और उचित देखभाल के साथ अधिकांश लोग फिर से सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकते हैं। आमतौर पर मरीज को 2–3 दिनों में अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है, लेकिन अगर कोई कॉम्प्लीकेशन्स हो तो यह अवधि बढ़ सकती है। डिस्चार्ज के समय मरीज और उनके परिवार को दवाओं और देखभाल से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी लिखित रूप में समझना बेहद जरूरी है।हार्ट अटैक के बाद दवाओं की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। कई मरीजों को एक साथ कई दवाएं लेने को लेकर संदेह होता है, लेकिन हर दवा का अपना अलग उद्देश्य होता है—कुछ भविष्य के खतरे को कम करती हैं तो कुछ वर्तमान लक्षणों जैसे सांस फूलना, सीने में दर्द या शरीर में पानी जमा होने को नियंत्रित करती हैं।मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत के कार्डियोलॉजी विभाग के वाइस चेयरमैन एवं यूनिट हेड डॉ. राजीव अग्रवाल ने बताया “एस्पिरिन और अन्य ब्लड थिनर भविष्य में खून के थक्के बनने से रोकते हैं और इन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के कभी बंद नहीं करना चाहिए, भले ही किसी अन्य बीमारी का इलाज चल रहा हो। हल्की चोट या कभी-कभी नाक से खून आना सामान्य साइड इफेक्ट हो सकते हैं। दर्द के लिए पैरासिटामोल को प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि आइबुप्रोफेन जैसी दवाएं दिल के मरीजों के लिए सुरक्षित नहीं मानी जातीं। स्टैटिन दवाएं खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करती हैं और दोबारा हार्ट अटैक या स्ट्रोक के खतरे को घटाती हैं। बीटा ब्लॉकर्स दिल की धड़कन को नियंत्रित करते हैं, नाइट्रेट्स दिल की ब्लड वेसल्स को फैलाकर ब्लड फ्लो बेहतर बनाते हैं, जबकि ACE inhibitors या ARB दिल को रिकवर होने में मदद करते हैं और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखते हैं। इसके अलावा SGLT2 inhibitors जैसी दवाएं भी अब हार्ट अटैक के बाद दी जाती हैं, चाहे मरीज को डायबिटीज हो या नहीं।“हार्ट अटैक के बाद कार्डियक रिहैबिलिटेशन (Cardiac Rehabilitation) बेहद जरूरी होता है, लेकिन भारत में इसे अक्सर नजरअंदाज किया जाता है। यह एक संरचित प्रोग्राम होता है जो मरीज की रिकवरी को बेहतर बनाता है। आजकल कई किफायती ऐप-आधारित सेवाएं भी उपलब्ध हैं, जो इस प्रक्रिया में मदद करती हैं। इसमें तीन मुख्य पहलू शामिल होते हैं—पहला, एक्सरसाइज और संतुलित डाइट, जिसमें धीरे-धीरे शुरुआत कर नियमित और मध्यम स्तर की गतिविधि को अपनाना चाहिए; दूसरा, जोखिम कारकों को नियंत्रित करना जैसे स्मोकिंग, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज और मोटापा; और तीसरा, मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना, क्योंकि हार्ट अटैक के बाद स्ट्रेस, एंग्जायटी और डिप्रेशन आम होते हैं।डॉ. राजीव ने आगे बताया “खानपान में भी विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। हार्ट-हेल्दी डाइट में ताजे फल और सब्जियां, लीन प्रोटीन जैसे कम वसा वाला मांस, बिना स्किन वाला चिकन, मछली, नट्स, बीन्स और दालें शामिल करनी चाहिए। साबुत अनाज और प्लांट-बेस्ड ऑयल जैसे ऑलिव ऑयल दिल के लिए फायदेमंद होते हैं। लो-फैट डेयरी प्रोडक्ट्स और अंडे सीमित मात्रा में लिए जा सकते हैं, जबकि नमक का सेवन कम रखना चाहिए। वहीं, फास्ट फूड, तली-भुनी चीजें, पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा चीनी और फैट वाले स्नैक्स जैसे चिप्स, बिस्किट, केक और आइसक्रीम से दूरी बनानी चाहिए। रेड मीट का सेवन सीमित रखें, अल्कोहल कम करें और हाइड्रोजेनेटेड ऑयल वाले खाद्य पदार्थों से बचें, क्योंकि ये दोबारा दिल की समस्या का खतरा बढ़ा सकते हैं।“हार्ट अटैक के बाद फॉलो-अप केयर भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक बार हार्ट अटैक होने के बाद भविष्य में दोबारा दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए नियमित रूप से डॉक्टर से मिलना, सभी दवाएं समय पर लेना और सुझाए गए टेस्ट करवाना जरूरी है, साथ ही एक हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना बेहद जरूरी है।



