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यादें योग उत्सव की


श्रुति पंत
विशेष संवाददाता
जैसे रंग किसी जाति, धर्म, रंग रूप में भेद नहीं करता वैसे ही योग भी सबको समानता से अपनी शरण में लेता है, इसी का एक उदाहरण हमें हर वर्ष परमार्थ निकेतन के अंतर्राष्ट्रीय योग उत्सव में दिखायी देता है। 7 दिवसीय इस योग उत्सव में देश विदेश से क़रीब 30 से अधिक योग एवम् अध्यात्म गुरु और 1500 योग के प्रशंसक शामिल होते है । गंगा के पावन तट पे सुबह 4 बजे से शाम 5 बजे तक अलग अलग योग / अध्यात्म गुरु भिन्न भिन्न प्रकार के योग जैसे कुंडलिनी, हठ योग, विन्यास, प्राणायाम, साउंड हीलिंग, योग द्वारा थेरेपी, मुद्रा योग के ज्ञान की गंगा बहाते है और फिर शाम में गंगा आरती और भजन संध्या का आनंद लेते है । पिछले वर्ष मुझे भी 2 दिन इस त्योहार में शामिल होने का अवसर मिला और नये अनुभव हुए। इन्दु शर्मा के प्राणायाम और मंत्रों के साथ सुबह की शुरुआत, फिर बीटल्स आश्रम में गायत्री मंत्र संस्कृत व यहूदी गायक द्वारा अनुवादित हिब्रू भाषा में जाप से लेकर अष्ट्रिद स्लेगटेन के हीलिंग साउंड थेरेपी का अनुभव अद्वितीय था । स्वामी चिददानंद और साध्वी भगवती द्वारा परमार्थ निकेतन में आयोजित यह वार्षिक योग उत्सव इस बात का साक्ष्य है कि मानवता इंसान का सबसे पहला कर्तव्य है और बहुत से उलझे हुए सवालो का जवाब ।
इस वर्ष योग का यह महा उत्सव शिवरात्रि 8 मार्च से शुरू हो रहा है, आइए सब मिलकर महा योगी शिव शंकर के साथ इस महा उत्सव को दुनिया के कोने कोने में पहुँचाये ।

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